
जिसने अपनी भूख मिटाकर मुझे खिलाया, अपनी नींद भुलाकर जिसने मुझे सुलाया वो थे मेरे पापा।बचपन से जिसने मुझे सबसे ज्यादा चाहा वो थे मेरे पापा, ज़िन्दगी में जिसने सबसे ज्यादा अहमियत दी मुझे वो थे मेरे पापा। पापा ने ही मुझे चलना सिखाया, पापा ने ही इस दुनियाँ के तौर तरीके सिखाये साथ ही दुनिया से मुझे लड़ना सिखाया। पापा ने मुझे ज़िन्दगी जीने सिखाया और ज़िन्दगी जीने का नज़रिया सिखाया, ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से भी वाकिफ करवाया। सपने जो मेरे थे पर उन्हें पूरे करने का रास्ता तो कोई और बताया जा रहा था वो थे मेरे पापा। मैं कितना भी बड़ा बन जाऊं पर हमेशा रहूगां पापा का तो प्यारा बच्चा। मेरी साहस मेरी इज्जत मेरा सम्मान है पिता मेरी ताकत मेरी पूंजी मेरी पहचान है। कभी कभी में सोचता था कि, पापा के बिना मेरी ज़िन्दगी का एक पल भी कैसे कटेगा। पापा ने ही मुझे हर दर्द गम में हंसना सिखाया, अपनी कमजोरियों से लड़ना सिखाया। मेरे पापा मेरे लिए दुनिया से भी लड़ सकते थे। बचपन से एक पापा ने खुद को सख्त बनाकर मुझे कठिनाइयों से लड़ना सिखाया है मुझे ख़ुशी देने के लिए उन्होंने अपनी खुशियों की परवाह नहीं की। मेरे पिता जो कभी शिक्षक बनकर गलतियां बताते थे तो कभी दोस्त बनकर कहते हैं कि ‘मैं तुम्हारे साथ हूं’।मेरे पिता मेरे लिए वो कवच हैं जिनकी सुरक्षा में रहते हुए मैंने अपने जीवन को एक दिशा देने की सार्थक कोशिश की हैं। जाहिर है, अपने बच्चे के लिए तमाम कठिनाईयों के बाद भी पिता के चेहरे पर कभी शिकन नहीं आती। शायद इसीलिए कहते हैं कि पिता ईश्वर का रूप ही होते हैं, क्योंकि खुद सृष्टि के रचयिता के अलावा दुसरे किसी के भीतर ऐसे गुण भला कहाँ हो सकते हैं। आप जितने भी सफल व्यक्तियों को देखेंगे, तो उनके जीवन की सफलता में उनके पिता का रोल आपको नज़र आएगा. उन्होंने अपने पिता से प्रेरणा ली होती है और उनको आदर्श माना होता है।
किसी ने सच ही कहा है-
“पिता रोटी हैं कपडा हैं मकान हैं,
पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान हैं,
पिता हैं तो घर में प्रतिपल राग हैं,
पिता से माँ की चुरी बिंदी और सुहाग हैं,
पिता हैं तो बचों के सरे सपने हैं,
पिता हैं तो बाजार के सारे खिलोनें आपने हैं।”